सरयू राय का विश्लेषण: "नीतीश के रहते बिहार में शराबबंदी खत्म होना नामुमकिन, सम्राट चौधरी के लिए डगर आसान नहीं"

सरयू राय का विश्लेषण: "नीतीश के रहते बिहार में शराबबंदी खत्म होना नामुमकिन, सम्राट चौधरी के लिए डगर आसान नहीं"

the Road Ahead is Not Easy for Samrat Chaudhary.

रांची। the Road Ahead is Not Easy for Samrat Chaudhary. बिहार में शराबबंदी खत्म करना नई सरकार के लिए संभव नहीं है। जमशेदपुर पश्चिम से जदयू विधायक और झारखंड के पूर्व मंत्री सरयू राय का कहना है कि जब तक नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति में हैं, तब तक राज्य में शराबबंदी समाप्त नहीं होगा।

सरयू राय ने कहा कि शराबबंदी सिर्फ एक नीतिगत फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में नई सरकार इसे खत्म करने का जोखिम नहीं उठाएगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा शासित राज्यों में गुजरात को छोड़कर कहीं भी पूर्ण शराबबंदी लागू नहीं है, जबकि गुजरात में भी नियंत्रित व्यवस्था के तहत अनुमति मिलती है।

सरयू राय ने नीतीश कुमार को एक सक्षम और योग्य प्रशासक बताते हुए कहा कि वे अपने स्तर पर निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम थे। हालांकि वे सहयोगियों से चर्चा करते थे, लेकिन अंतिम निर्णय में बाहरी हस्तक्षेप नहीं होता था।

उन्होंने कहा कि नीतीश ने एक मजबूत क्षेत्रीय नेता की छवि बनाई, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलते थे। खासकर गैर यादव पिछड़े, अत्यंत पिछड़ी जातियां और दलित-महादलित उनके सामाजिक आधार का अहम हिस्सा रहे। यही वजह रही कि उनके खिलाफ कभी गंभीर गुटबंदी नहीं उभरी और वे लंबे समय तक सर्वमान्य नेता बने रहे।

सम्राट चौधरी के सामने नई चुनौतियां

बदले राजनीतिक परिदृश्य में अब जब बिहार की कमान भाजपा के पास है तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने कई चुनौतियां खड़ी होंगी।
सरयू राय के अनुसार, एक राष्ट्रीय दल के नेतृत्व में काम करते हुए स्वाभाविक रूप से संगठन का दबाव रहेगा।

इसके अलावा पार्टी के भीतर गुटबाजी भी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा में आंतरिक प्रतिद्वंद्वी सम्राट चौधरी को कमजोर दिखाने की कोशिश कर सकते हैं।

निशांत कुमार की राजनीति में सीमित रुचि

नीतीश कुमार के निजी जीवन पर बात करते हुए सरयू राय ने कहा कि उनके पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में विशेष दिलचस्पी नहीं रही है। वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए उन्हें पहले प्रशिक्षण की आवश्यकता थी।

बिना तैयारी के किसी पद पर लाना उचित नहीं होता। हालांकि उन्होंने निशांत को बुद्धिमान और शिक्षित बताया। साथ ही, जदयू में उन्हें सदस्यता दिलाने के पीछे सामाजिक समीकरणों खासकर कुर्मी समुदाय के समर्थन आधार को बनाए रखने को एक अहम कारण बताया।